Posts

(6) मैं तो नाचूंगी गूलर तले!

Image
अगले/पिछले ब्लॉग पोस्ट:  (1)  तवा भाजी-परिचय (2)  पोई, पोई ! (3)  गुडरी की भाजी, राजा का भोज (4)  नवरतन भाजी या सीता भाजी ? (5) कनकौए का साग और बाजरे की रोटी । हमारे बचपन से आज तक बारिश में शहर की सड़कें नाले का काम करती आ रही हैं। अब जब हम 'विकास की राह' पर अग्रसर हैं तो  नाले भी  सड़कों का काम करने लगे हैं। ये 'सड़कें' भू-माफिया, नेता और रसूखदारों द्वारा कब्जा ली जाती हैं। ऐसी 'सड़कें' या 'प्राइवेट' नाले अब कई दुकानों के Foyer या बरामदा और बंगलों के Backyard होते हैं।  हमारे एरिया के पास के कब्जाए नाले के किनारे किस्मत से कुछ पेड़ 'विकास की पैनी नज़र' से छूट गए हैं। और उनमें से एक पेड़ गूलर का भी है। इस पेड़ पर कुछ चिड़ियों, कीट पतंगों और हमारा ही आना जाना होता है।  इस पेड़ के लिए हमसे किसी मनुष्य की कोई प्रतियोगिता या होड़ नहीं है। यहां के पढ़े-लिखे धनाढ्य विद्वान  गुलाब-जामुन और गुलगुले खाएंगे; गूलर तो खाने से रहे। इस दौर के बच्चे भी पके गूलर नहीं खाते हैं। सब अपना ही माल है। बस यहीं से साल में एक दो बार गूलर तोड़ लेते ह...

(5) कनकौए का साग और बाजरे की रोटी!

Image
पंकज खन्ना 9424810575 पिछले ब्लॉग पोस्ट:  (1)  तवा भाजी-परिचय (2)  पोई, पोई ! (3)  गुडरी की भाजी, राजा का भोज (4) नवरतन भाजी या सीता भाजी ? आज आपके भियाओ बनाने वाले हैं कनकौआ का साग। बाजरे की रोटी बनाने का हक तो सिर्फ श्रीमतीजी ही रखती हैं। आगे बताएंगे ऐसा क्यों। सबसे पहले कनकौआ की फोटो देख लीजिए।        (ये पत्तियां आपके चेहरे का तेज देखकर नहीं चमक रही हैं। फोटो बारिश में ली गई है, बुद्धू! बताना ये था कि देखो कैसे पथरीली जमीन में से भी कनकौआ उग जाता है आराम से।) कनकौआ के अन्य नाम हैं: Commelina benghalensis, Benghal dayflower, Tropical Spiderwort, Wandering Jew, कनशीरा, कांचरा आदि।             (कनकौआ की छवि फूलों के साथ।) कनकौए में विटामिन B2, B3, और C पाए जाते हैं। इसके अलावा कनकौए में कॉपर, आयरन, फास्फोरस,पोटैशियम,सोडियम और जिंक जैसे मिनरल भी काफी मात्रा में पाए जाते हैं। कनकौए के फ़ूल  नीले या बैंगनी रंग के होते हैं और बहुत सुंदर होते हैं। ऊपर वाली पहली फोटो देखी-देखी लग रही है ना...

(4) नवरतन भाजी या सीता भाजी!?

Image
पंकज खन्ना 9424810575 पिछले ब्लॉग पोस्ट:  (1)  तवा भाजी-परिचय (2)  पोई, पोई ! (3) गुडरी की भाजी, राजा का भोज पिछले दो लेखों के बाद प्रश्नों की बौछार झेल रहे हैं। पहले एक बड़े प्रश्न से निपट लें, फिर खेलेंगे भाजी-भाजी, तवाभाजी। उज्जैन वाली जिज्जी की बातें पढ़कर  बहुत लोग पूछ रहे हैं ये 'डामिस' क्या होता है। आज पहले इसी प्रश्न के उत्तर  को समझ लेते हैं। डामिस लगभग लुप्तप्राय शब्द है। बिल्कुल हमारी लुप्तप्राय सब्जियों के समान। सत्तर और अस्सी के दशक में मालवांचल में 'डामिस' शब्द काफी बोला जाता था। वैसे सभी पीढियों के लोग इसे प्रयोग में लाते थे। लेकिन रिटायर्ड दादाजी लोग ही इसे ज्यादा बोला करते थे। हमारे बचपन वाले मोहल्ले के दादाजी एक अलग ही प्रजाति के होते थे। अक्सर घरों के ओटलों पर ग्रुप में पाए जाते थे। थोड़ा सा पोपला मुंह, सर पर टोपी, हाथ में छड़ी, मुंह में बीड़ी, खादी की पेंट, पेंट की  जेब में चूने और तंबाखू की दोमुंही डिब्बी, पैर में सैंडल या चप्पल, सर्वत्र आयोडेक्स की सुगंध, कभी-कभी गले में टाई भी। स्कूटर नहीं बिस्कुटर, स्कूल नहीं बिस्कुल बोला करते थे। सब...

(3) गुडरी की भाजी, राजा का भोज!

Image
पंकज खन्ना 9424810575 पिछले ब्लॉग पोस्ट:  (1) तवा भाजी-परिचय (2) पोई, पोई ! आप फिर आ गए! मतलब  पोई   पसंद आई! धन्यवाद! स्वागतम!!😊💐🙏 पूरा विश्वास था कि मेरे करण-अर्जुन (चटोरे-चटोरी) आयेंगे। जरूर आयेंगे!  पोई  के बाद गुडरी का साग भी खाएंगे! हमारे समान मरभुक्खे जो हैं!  तो फिर आज अच्छे से बनाते हैं  गुडरी का साग आप जैसे  गुदड़ी के लालों और लालियों  के लिए! गुदड़ी के लाल का मतलब होता है: साधारण गरीब घर में जन्मा गुणवान व्यक्ति। गुडरी की भाजी भी ऐसे ही  दिखने में साधारण, पर गुणों से भरपूर होती है। दरअसल, गुडरी की भाजी ही गुदड़ी का लाल है। और देखिए, गुडरी और गुदड़ी दोनों की स्पेलिंग भी एक ही है: Gudri!  और एक अंदर की बात बताऊं!? इस औषधि संपन्न सब्जी गुडरी को मंगलवार को मंतर (मंत्र) मारकर  खाने से पति या पत्नी का वशीकरण भी किया जा सकता है!  (दशकों पहले  मोहल्ले के घड़ीसाज मुक्का मामू ने  मावस की एक रात  मोमबत्ती की मद्धिम रोशनी में, महूए की मदहोशी में, ये महती माहिती मोहल्ले के कुंआरे छोरों को दी थी।) वश...

(2) पोई,पोई!

Image
पंकज खन्ना 9424810575 ये  तवा भाजी   सिरीज़  का पहला एपिसोड है। आप   तवाभाजी की पहली परिचयात्मक (Introductory) पोस्ट भी पढ़ सकते हैं जिसमें तवाभाजी सीरीज में क्या और क्यों लिखा जाएगा बताया गया है। तवा भाजी सीरीज की  पहली कम जानी पहचानी सब्जी है: पोई   (Malabar Spinach)। ये एक  हरी पत्तेदार, बेलदार (Creeper) सब्जी है जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होती है। पोई  में कई पोषक तत्व जैसे विटामिन A,C, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम काफी मात्रा में पाये जाते हैं।  इसमें कुछ एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं जैसे  Lutein और Zeaxanthin.  कम कैलोरी और ज़्यादा फाइबर होने के कारण ये  वजन कम करने की उम्मीद रखने वाले  लोगों के लिए आदर्श सब्ज़ी है। इसकी पत्तियाँ, तने और फल सभी खाने योग्य होते हैं और मस्त होते हैं। पोई लाल तने ( Basella Rubra) और हरे तने ( Basella Alba) में पाई जाती है। दोनों के स्वाद में कुछ अंतर नहीं होता है लेकिन लाल तने वाली पोई ज्यादा आकर्षित करती है। बहुत हो गया पोई का वर्णन...

(1) तवा भाजी-परिचय

पंकज खन्ना 9424810575                       तवा भाजी- परिचय तवे का एक रूप हम लोग देख ही चुके हैं: तवा संगीत ! तवे के गाने सुनना, तवा संग्रह करना या इन तवों के बारे में बकर-बकर करते रहना तवाबाजी है। हम सब पिछले कई सालों से  तवा संगीत  के माध्यम से तवे से उतरे भुला दिए गए गानों का आनंद ले रहे हैं।  अब तवाबाजी के साथ-साथ तवा भाजी भी करेंगे।  और इस नई ब्लॉग सिरीज़ तवा भाजी में आनंद लेंगे तवे से उतरी भुला दी गई सब्जियां का। ये तो आपको बहुत पहले ही बता चुके हैं गाना हो या खाना, तवा ही उत्तम है! यहां खूब बातें होंगी खाने पीने की। सब्जी और फलों की। आज सब्जी और फलों का उत्पादन सिर्फ मार्केट के हिसाब से होता है। उत्पादन और लाभ बढ़ाने के लिए अब सिर्फ हाइब्रिड सब्जियां ही उगाई जाती हैं। वो सब्जियां और फल  जिन्हें हमारे पूर्वज सैकड़ों सालों से खाते आ रहे थे; हमारे लिये अब सिर्फ हाइब्रिड फॉर्म में ही उपलब्ध हैं। इसी मार्केट के प्रभाव से पिछले तीन चार दशकों से बहुत सारे फल और सब्जियां लुप्त होते जा रहे हैं। वो मौलिक ...