(2) पोई,पोई!
पंकज खन्ना
9424810575
ये तवा भाजी सिरीज़ का पहला एपिसोड है। आप तवाभाजी की पहली परिचयात्मक (Introductory) पोस्ट भी पढ़ सकते हैं जिसमें तवाभाजी सीरीज में क्या और क्यों लिखा जाएगा बताया गया है।
तवा भाजी सीरीज की पहली कम जानी पहचानी सब्जी है: पोई (Malabar Spinach)। ये एक हरी पत्तेदार, बेलदार (Creeper) सब्जी है जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होती है। पोई में कई पोषक तत्व जैसे विटामिन A,C, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम काफी मात्रा में पाये जाते हैं। इसमें कुछ एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं जैसे Lutein और Zeaxanthin.
कम कैलोरी और ज़्यादा फाइबर होने के कारण ये वजन कम करने की उम्मीद रखने वाले लोगों के लिए आदर्श सब्ज़ी है। इसकी पत्तियाँ, तने और फल सभी खाने योग्य होते हैं और मस्त होते हैं।
पोई लाल तने ( Basella Rubra) और हरे तने ( Basella Alba) में पाई जाती है। दोनों के स्वाद में कुछ अंतर नहीं होता है लेकिन लाल तने वाली पोई ज्यादा आकर्षित करती है।
बहुत हो गया पोई का वर्णन। अब भक्षण पे आ जाते हैं।
सुबह-सुबह दो-चार किलो पोई की व्यवस्था कर लें। ये इंदौर की चोइथराम सब्जी मंडी में मानसून के बाद कभी- कभी मिल जाती है। टोरी कॉर्नर वाले सब्जी मार्केट या इतवारीया बाजार में भी इतवार के दिन मिल सकती है। कभी-कभी शहर के विभिन्न हाट में भी किसान भाई इसे बेचने के लिए लाते हैं।
या फिर शहर में आस-पास कहीं खाली जमीन ढूंढे और फिर उसमें पोई ढूंढें। कुछ बंगलों और मल्टी की बाउंडरी वॉल से लटकती हुई भी दिख सकती है। उनसे पूछ के या बस ऐसे ही तोड़ डालने का भी विकल्प है। पोई और गालियां दोनों मुफ्त में मिल सकती हैं!
बहुत सुंदर सब्जी है पोई, एकदम सजावटी। सबसे पहले पोई की एक लंबी पतली स्टेम को पत्तियों के साथ एक फूलदान या गिलास या किसी पानी से भरे बर्तन में सजा लें, किचन में ही।
पोई बनाते हुए इसे देखते रहेंगे तो अच्छा ही लगेगा। जरूरी नहीं है कि किसी भी डिश को सिर्फ बनाने के बाद ही सजाया जाए। पहले भी सजा सकते हैं।
बाकी बची हुई पोई के पत्तों से डंठल (Stems) अलग कर दें और पत्तियां अलग कर दें। दो चार पत्तियों को पाकिस्तानी समझकर कच्चा चबा जाएं। भौत मज़ा आएगा!
पोई की अनेक संभव डिशेस में से पहले सिर्फ पांच साइड डिशेज के बारे में बात कर लेते हैं: रायता, दाल, पकोड़े, कचूमर सलाद और सूप। आप ही देख लें आप कितनी बनाना चाहते हैं।
(1) रायता: सबसे पहले रायते के लिए पोई के कुछ पत्ते, प्याज, हरी मिर्च, शिमला मिर्च बारीक-बारीक काट लें। सब को दही में डाल दें। एक चम्मच राई या सरसों की दाल डाल दें। दो चार घंटे के लिए पड़े रहने दें इसे, बिल्कुल वैसे ही जैसे आप घंटों पड़े रहते हैं फुर्सत में। जब उठेंगे तो बेहतरीन रायता तैयार मिलेगा। चाव से खाइए, फैलाइए मत!
(2) पोई की दाल: पोई के मोटे और बड़े वाले डंठलों को तीन चार इंच के साइज में काट-काट कर तुअर या मसूर की दाल में डाल दें। अगर संभव हो तो दाल को चूल्हे पर बनाएं। अगर नहीं है तो चूल्हे में गया चूल्हा! आप गैस पर ही बना लीजिए।
चाहें तो दाल बनाने के साथ-साथ किशोर कुमार के इस प्यारे गाने का और गाने में दिखाए गए चूल्हे का आनंद भी ले सकते हैं: एक रोज़ हमारी भी दाल गलेगी। (फिल्म: बंदी (1957)। गीतकार: राजेंद्र कृष्ण। संगीतकार: हेमंत कुमार।)
इन पोई के डंठलों को आप मुनगा/सुरजने ( Drumstick, Moringa) की फली मान कर दाल के साथ सेवन करें।
बहुत सारी डिशेस बन रही हैं आज! वास्तव में आप काफी ज्यादा खाने वाले हैं। बदहजमी हो सकती है। इसलिए पोई की दाल को अभी अच्छे से दम दे दें। सुबह कम लगाना पड़ेगा!
(3) पोई के पकोड़े: रोज-रोज तो आप पोई लाने से रहे। थोड़े से पोई के भजिए (पकोड़े) भी बना लें। बिल्कुल वैसे ही जैसे आप पालक के पकोड़े बनाते हैं। पूरे पत्ते के भी बना सकते हैं और पत्तों को काट कर भी बना सकते हैं। थोड़ी मिर्ची जरूर डालिए इसमें। इतनी तो जरूर डालिए कि पड़ोसी/पड़ोसन को लगे! वरना पूरी Exercise ही बेकार है;)
खुश रहिए, राम नाम भजिए। छन रहे हैं पोई के भजिए।
(4) पोई का सलाद: प्याज, टमाटर, खीरा और पोई के पत्तों को बहुत बारीक काटकर इनका कचूमर निकाल दीजिए। अब इसमें चाहें तो थोड़ी सी मोटी पिसी मूंगफली भी डाल दें। नमक थोड़ा ही छिड़कना है। ऐसा नहीं कि नमक छिड़कते जाएं, छिड़कते जाएं। ये पोई का सलाद है किसी इंसान के जिस्म का घाव नहीं!
(5) पोई का सूप: ये रेसिपी उन ख़िज़ाबी काले बालों वाले पिता-तुल्य बुजुर्ग दोस्तों के लिए जिनके हाथ पैर में जान नहीं, मुंह में दांत नहीं और पेट में आंत नहीं। लेकिन समझते अपने आप को किसी से कम नहीं।
ये देसी खाना बिल्कुल नहीं झेल पाते हैं। इन्होंने जिंदगी में कभी पोहे में उसल नहीं डाले। भरपूर मक्खन वाले आलू पराठे इन्होंने पिछले जनम में खाए थे, अभी तक पचा ही रहे हैं! कचौरी देखकर बिदक जाते हैं, कहते हैं ये तो टाइम बम है। सड़क छाप होटलों में स्कीम वाला पानी ( एक ग्लास पानी, 36 कीड़े मुफ्त) इन्होंने कभी नहीं पीया। अमरत्व पा लेना चाहते हैं।
ये वो प्रिय दोस्त हैं जिनकी जवानी इसीलिए थोड़ा जल्दी शॉर्ट कट मार गई और ये बचपन से सीधे बुढ़ापे में प्रवेश कर चुके हैं। लेकिन बाल काले करके अपने आपको जवान ही समझते हैं और हमें हमारे सफेद बालों के कारण पिता-तुल्य बताते हैं! बताईए!!
इनकी लाइफ तो सूप में ही है! ये नासपिटे बस सूप ही ले सकते हैं। जैसे भी हैं पिता तुल्य हैं। इसलिए पोई के सूप पर लौट आते हैं इनके लिए!
पोई में पालक की तुलना में कहीं अधिक स्टार्च होता है। इसलिए सूप बनाने के लिए ये बहुत अच्छी सब्जी है। बारीक कटे हुए अदरक और लस्सन को कम घी या तेल में हल्का सा फ्राई कर लें। फिर इसमें पिसी हुई पोई डाल कर अच्छे से उबाल लें। नमक और काली मिर्च डाल दें। आप चाहें तो इटालियन गरम मसाला (Oregano ) भी डाल सकते हैं। हमारी पसंद तो सूखा पुदीना रहेगी। सूप में अच्छे से तूप (घी) या मक्खन ऊपर से डालेंगे तो और ज्यादा स्वादिष्ट लगेगा।
घी-तेल-मक्खन हजम नहीं होता है तो उबली पोई खा या पी कर यहीं से रिवर्स गियर में रवानगी डाल दें। मेन डिश आपके किसी काम की नहीं है!
Main Dish: मेन डिश बनाने के लिए दो-चार फुट व्यास (Diameter) वाला एक बड़ा सा तवा और एक बड़ा सा भारी पलटा ( Turner) ले लें। ज्यादा पोई ले रहे हैं तो दो पलटे भी ले सकते हैं। दोनों हाथों में एक एक। लुंगी और बनियान/टीशर्ट में आ जाएं तो कुछ कर गुजरने वाला जबरदस्त फील भी आ जाएगा।
तवे पर पलटे के साथ भाजी बनाने के कई फायदे हैं। पहला फायदा पलटे को तवे पर चलाने से बहुत ही मधुर संगीत उत्पन्न होता है। ये प्यारा सा संगीत सुनने से और भाजी की सुगंध लगातार आने से भाजी बनाने में दिलचस्पी बनी रहती है, भूख भी बढ़ जाती है। दूसरा फायदा पड़ोसी/पड़ोसन का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं पलटे की धुन से! आप की पाक कला के चर्चे पूरे मोहल्ले में फैल जाएंगे। तीसरा फायदा,लगातार दोनों हाथ चलाने से हाथों की मसल्स बनती हैं। चौथा सबसे प्रमुख फायदा ये है कि खुले तवे और खुली आंच के कारण एक अलग ही अनोखा देशी स्वाद प्राप्त होता है जो किसी फाइव स्टार या मास्टरशेफ से तो नहीं ही मिलेगा।
भेंजी, भेंजी गुस्सा मत होइए, आप चाहें तो कढ़ाई और कलछी से भी काम चला सकती हैं। तवे को और पलटे को खिड़की से बाहर फेंक दीजिए, लेकिन पोई को गले लगा लीजिए।
(इसी फेंकने वाली बात को Tharoorian English में कोशिश करके लिखें तो कुछ ऐसा लिख सकते हैं:
Defenestrate the griddle but do cwtch this luxuriant leafy comestible known scientifically as Basella Rubra.
बीच-बीच में बगैर 'Teacher' का सेवन किए बगैर अंदर से टीचर बाहर आ जाता है। थोड़ी देर अंग्रेजी में फड़फड़ाता है और फिर औकात पे आ जाता है, हिंदी में!)
पोई पर भी आ जाते हैं! हिंदी में!
प्याज, अदरक, लस्सन और हरी मिर्च को बहुत महीन काट लें। तवे या कढ़ाई में ढेर सारा तेल डाल दीजिए। तेल कच्ची घानी का सरसों का हो तो मज़ा आ जाएगा। इन चारों को सबसे तेज आंच पर तब तक भूनें जब तक इनके सारे पोषक तत्व पूर्णतः नष्ट ना हो जाएं। पोषक तत्वों के लिए बाकी साइड डिशेज हैं ना!
आप इतनी अच्छी सब्जी बना रहे हैं। पूरे घर में खुशबू फैल गई है। आपके जीवन साथी ( पति या पत्नी या जो भी) किचन में आकर बोलने ही वाले हैं: इतना तेल!?
गाँव वालों, हमारे संस्कार और संस्कृति को बिल्कुल नहीं भूलना है। झगड़ा नहीं करना है। वो आपके अपने जीवन साथी हैं। उनकी इज़्ज़त करनी है। उनसे बहस भी नहीं करनी है। प्लीज़, पैर तो बिल्कुल मत चलाइए, मैले हो जाएंगे! बस धक्के मार-मार के किचन से बाहर कर दीजिए। शाम को रिझा लेना!
आपके और पोई के बीच में कोई नहीं आ सकता! वो भी नहीं! गुस्सा ठंडा करिए। बेलन नीचे रख दीजिए। हाथ धो लीजिए। वो और हेल्थ गए तेल लेने! एक बड़ा चम्मच तेल और डाल दीजिए तवे या कढ़ाई में। जे बात!
अब आयेगा न मज़ा पोई का! दोनों पलटे सतत चलते रहैं। टन, टन! टन, टन!! आपकी इच्छानुसार नमक, मिर्च, हल्दी और अन्य मसाले भी डाल दें। हल्दी जरूर डालें। काम आएगी। जब प्याज, लस्सन और अदरक भुन-भुन के लाल, बहुत लाल हो जाएं तब कटी हुई पोई तवे या कढ़ाई में डाल दें। फिर से पलटे चलाएं। अलट-पलट के चलाएं।
आप के पलटू नेता लगातार पलटी मारते रहते हैं। कुछ सीखें। आप लगातार पलटा मारें! पलटी मारने से राजनीतिक रोटी और पलटा मारने से तवा भाजी अच्छी सिंक जाती है। तवे के चप्पे-चप्पे तक पलटा पहुंचना चाहिए। आप के पलटू तो पहुंचते ही हैं चप्पे चप्पे पर! साथ-साथ में ये अवश्य गाते रहें: चप्पा चप्पा पलटा चले! चप्पा चप्पा पलटू चले!
पलटा चलाने के बाद भी भाजी थोड़ी से तवे पर लग सकती है। लेकिन पोई में पानी नहीं डालना है, बिल्कुल नै डालना है। नीट ही सेवन करना है बेवड़े, बेवड़ियों! लेकिन तेल और डाल सकते हैं।
(तेल! तेल! तेल! सरसों का तेल! कच्ची घानी का तेल! तेल कंपनी में दो दशक से ज्यादा काम किया है। तेल से कुछ ज्यादा ही प्रेम रहा है भले ही खाने का हो या जलाने का। चर्चा होगी इस बारे में फिर कभी मौका देखकर!)
हाथ की मांसपेशियां ( Muscles) हरकत करती रहें। आपने वो प्रसिद्ध हैदराबादी कव्वाली शायद सुनी होगी: मियां पाया! पाया, पाया, पाया! इसे एक बार जरूर सुन लें। यू ट्यूब का एक लिंक तो लगा ही देते हैं: पाया पाया कव्वाली। कव्वाली सुनने के साथ पलटे लगातार चलते रहें। टन, टन! टन, टन!! ये संगीत पड़ोसी/पड़ोसन तक पहुंचना जरूरी है।
अब आप पाया पाया के स्थान पर मस्त होकर, पलटों की संगत में, कुछ ऐसे गाएं: पोई,पोई,पोई; भिया पोई, पोई! दो मिनट तक गाते रहें। खोई और सोई पोई खिल उठेगी। आप झूम उठेंगे: पोई,पोई,पोई! भिया पोई, पोई!!
अंत में पलटों को आदि मानव के हथियार के समान हवा में लहराएं और ऊटपटांग डांस करते हुए ऊंचे स्वर में गाएं: झिंगालाला हू, झिंगालाला हू। बस ऐंवे ई!
शादी ब्याओ और अन्य पार्टियों में देख रखे हैं आपके आदि मानव वाले नृत्य गीत। सचमुच कितना गंदा नाचते और गाते हैं आप! दुनिया को पका डालते हैं!! इस पोई की क्या औकात है!? पोई अच्छी तरह से पक चुकी है आपके गाने बजाने से! गाना और गैस एकदम बंद कर दीजिए।
बगैर फोटो और सोशल मीडिया के तो आप नहीं ही मानेंगे ना! पोई की फोटू तवे पर ही खींच कर सोशल मीडिया पर डाल दें। लोगों को ये फोटो देखकर गाय-भैंस की याद आ जाएगी! और फिर लोगों के कमेंट्स पढ़कर आपको नानी याद आ जाएगी! हम बगैर टिकट मज़ा लेंगे दूर से!
पोई की फोटो हो गई, अब पोई को तवे से उतार लें। अब आप इसी तवे पर रागी या ज्वार की ढेर सारी रोटियां सेंक लें। कड़क-कड़क! अपनी इच्छानुसार घी या मक्खन लगा लें। इतनी मेहनत की है, आठ दस तो खा ही लेंगे।
पूरा खाना तैयार है। अंदर वाले कमरे से उनके कराहने की आवाज भी आ रही है। इसीलिए मेन डिश में हल्दी डलवाई थी! खाना सबसे पहले उनके मुंह पे मार दीजिए। हल्दी के अलावा पोई में भी काफी दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं!
अब अच्छे से संडे लंच सेलिब्रेट करें उनके साथ:)
कितना खाते हो यार! इतना खा कर घर में ऐसे मत फैल जाओ। देर रात तक मौसिकी ( संगीत) के साथ हवा खारिज करते रहोगे और माहौल नापाक करोगे। पोई नाहक बदनाम हो जाएगी मुन्नी के समान। उठो थोड़ा चलो, फिरो, दौड़ो, बच्चों के साथ खेलो, डांस करो, साइकिल चलाओ। कुछ भी करो लेकिन घर से बाहर जाओ, हवा खाओ। निकालो मत!
दो चार घंटे की एक्टिविटी के बाद आपको अच्छा लगेगा। अब आप आराम फरमा सकते हैं। तवा भाजी हो चुकी है। अब तवाबाज़ी भी कर सकते हैं। तवा संगीत के जो आर्टिकल आपने पहले नहीं पढ़े थे अब पढ़ सकते हैं। 'हवाबाजी' से तो तवाबाजी ही बेहतर है:)
क्या पूछा आपने!? डिनर में क्या करेंगे!? देखो तो! लंच पचा नहीं और इनको डिनर की सूझ रही है। जनम जनम से भूखे हैं! चुपचाप फूलदान में लगे पोई के बचे हुए पत्ते तोड़कर खा लो। फिर चार ग्लास पानी पीकर, पीठ ऊपर कर के पेट के बल सो जाओ। भूख मर जाएगी। समझे!? भुक्कड़ कहीं के!
पंकज खन्ना
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