(1) तवा भाजी-परिचय

पंकज खन्ना
9424810575

  

                   तवा भाजी- परिचय


तवे का एक रूप हम लोग देख ही चुके हैं: तवा संगीत! तवे के गाने सुनना, तवा संग्रह करना या इन तवों के बारे में बकर-बकर करते रहना तवाबाजी है। हम सब पिछले कई सालों से तवा संगीत के माध्यम से तवे से उतरे भुला दिए गए गानों का आनंद ले रहे हैं। 

अब तवाबाजी के साथ-साथ तवा भाजी भी करेंगे।  और इस नई ब्लॉग सिरीज़ तवा भाजी में आनंद लेंगे तवे से उतरी भुला दी गई सब्जियां का। ये तो आपको बहुत पहले ही बता चुके हैं गाना हो या खाना, तवा ही उत्तम है!

यहां खूब बातें होंगी खाने पीने की। सब्जी और फलों की। आज सब्जी और फलों का उत्पादन सिर्फ मार्केट के हिसाब से होता है। उत्पादन और लाभ बढ़ाने के लिए अब सिर्फ हाइब्रिड सब्जियां ही उगाई जाती हैं। वो सब्जियां और फल  जिन्हें हमारे पूर्वज सैकड़ों सालों से खाते आ रहे थे; हमारे लिये अब सिर्फ हाइब्रिड फॉर्म में ही उपलब्ध हैं।

इसी मार्केट के प्रभाव से पिछले तीन चार दशकों से बहुत सारे फल और सब्जियां लुप्त होते जा रहे हैं। वो मौलिक देशी सब्जियां और फल बहुत याद आते हैं जो अब शहरी मार्केट में या तो दिखाई ही नहीं देते या कभी-कभी भूले-भटके प्रकट होते हैं।

तवा भाजी में बस इन्हीं लगभग भुला दी गई या कम जानी पहचानी सब्जियों और फलों के बारे में बात की जाएगी। आजकल के अधिकतर बच्चे पालक और मेथी के अलावा तीसरी किसी पत्ते वाली सब्जी का नाम भी नहीं बता पाएंगे। इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। क्योंकि अब सिर्फ  वृहद उत्पादन ( Mass Production) वाली सब्जियां ही मॉल या ऐप्स पर उपलब्ध होती हैं और घरों तक पहुंचती हैं। 

Pizza, Burger, Momos, Pasta खाने वाले बच्चों को मॉल में बिकने वाली केल, रोज़मेरी, ऑरिगेनो और बेसिल के बारे में थोड़ी जानकारी हो सकती है लेकिन पोई, बथुआ, चौलाई, लाल भाजी, अमाड़ी, कलमी, पोहाडे, गोंदी, बुहार भाजी, चरोटे, सुआ, कनकौए,  चंगेरी, गुडरी, कुल्फ़ा, खर भिंडी, फूट, चने की भाजी और अफीम की भाजी आदि के बारे में कुछ पता नहीं है।

लौकी, कद्दू, मूली, शलजम, अरबी, गांठ गोभी और चुकंदर आदि के पत्तों की भाजी के बारे में भी  बहुत सारे लोग अनभिज्ञ हैं। अन्य वन्य भाजियों की बात तो आप बिल्कुल ही रैन दें। हम ही कर लेंगे, वक्त आने पर!

गर्मी की छुट्टीयों में गलियों में बिकने वाले फल जैसे खिरनी, फालसा, लाल/हरे शहतूत, पके करौंदे, चारोली, देशी खजूर, ताज़ी अंजीर, विलायती इमली ( जंगल जलेबी), टेमरू, नाना प्रकार के देशी आम ( जिन्हें साग भी कहते हैं), मोरसली, रामफल, हप्पा रेवड़ी आदि फल शहरी मार्केट में अब बहुत ही कम दिखाई देते हैं। 

इन सभी फलों के पेड़ इंदौर की सड़कों के किनारे बहुतायत में उगे रहते थे। और फिर सड़कें और गलियां चौड़ी होती गईं। पेड़ कटते गए। मकानों और सड़कों के बीच की जमीन पर पेवर ब्लॉक्स बिछा दिए गए। ये बनाए तो इंसानों के चलने के लिए थे लेकिन इन पर या तो दुकानें  बन गईं या फोर व्हीलर्स, टू व्हीलर्स पार्क कर दिये गए। जमीन तो गई ही, पैदल यात्री फिर भी सड़क पर ही चल रहा है।

सत्तर अस्सी के दशकों तक शहर में जमीन अधिक दिखाई देती थी मकान कम। और इस जमीन पर धरती मां स्वयं ऊपर लिखी सब्जियां और फल उगा दिया करती थीं। अब शहर के एक कोने से  दूसरे कोने तक आपको सिर्फ मकान, दुकान, सड़क और वाहन दिखाई देंगे, जमीन नहीं। 

हम जिन सब्जियों की बातें इस ब्लॉग सिरीज़ में अगले कुछ महीनों में करने जा रहे  हैं उनमें से कुछ सब्जियां आज भी कुछ घरों के बगीचों में अपने आप उग जाती हैं। लेकिन घरों के मालिक इन पौष्टिक सब्जियों को अज्ञानतावश  खरपतवार या Weed समझकर घर के बगीचे से उखाड़ फेंकते हैं और फिर बड़ी शान से वहां सुंदर-सुंदर फूलों के पौधे और  सातसमंदर पार की विलायती  सब्जियां उगा कर अपनी मित्रमंडली और रिश्तेदारी में झांकीबाजी करते हैं।

इंसान ये बात लगभग भूल चुका है कि परम पिता यानी दुनिया के मालिक ही सबसे बड़े माली हैं। अहंकारी मानव भगवान के बनाए बगीचे को बर्बाद करके खुद के बगीचे बनाए जा रहा है। भगवान ने भूगोल और जलवायु के अनुसार हमें सब्जियां और फल प्रदान किए हैं।

लेकिन इंसान इन ईश्वर प्रदत्त सब्जियों को उखाड़कर विलायती सब्जियां उगाए जा रहा है। ये बात बिल्कुल भी तार्किक नहीं है इसलिए मनुष्य प्रजाति को सहर्ष स्वीकार्य है!

इन भुला दी गई लोकल लेकिन असाधारण  सब्जियों की पाक विधि या रेसिपी (Recipe) को भी थोड़ा अलग ढंग से ही पेश किया जाएगा इस ब्लॉग सिरीज़ में। इन विधियों में आपको उत्साह, आनंद और मस्ती की कभी भी कमी महसूस नहीं होगी। कोशिश रहेगी कि ज्ञान वर्धन, स्वास्थ्य वर्धन और स्वाद वर्धन के साथ आपका मनोरंजन भी हो।

तवा भाजी में ऐसा कुछ नहीं होगा कि आपको पाक विधि पढ़कर स्कूल-कॉलेज की Chemistry या Home Science की लैब  याद आ जाए: इतने ग्राम प्याज कटा हुआ, उतने ग्राम पिसा हुआ टमाटर, अदरक 13.7 ग्राम, लस्सन साढ़े नौ ग्राम, डेढ़ इलायची, पौने चार कलियां लौंग की। इनको इतने तापमान पर गरम करें। ये करें, वो करें। ये इंसट्रक्शन, वो इंस्ट्रक्शन। अब इसको ऐसे ही सजाएं और उनकी बताई तमीज़ से ही पेश करें। 

रेसिपी की किताबों और यू ट्यूब के वीडियो में बताई गई सभी रेसिपीज़ में आप सिर्फ नमक को 'स्वादानुसार' डाल सकते हैं। बाकी सब उनके नियमानुसार होता है। 

प्रोमिस, ऐसी कोई  विस्तृत पारंपरिक पाक विधि या रेसिपी नहीं लिखी जाएगी इस ब्लॉग में। पंकी का पिंकी प्रोमिस!

यहां तवा भाजी में सब कुछ आपके स्वादानुसार और आपके नियमानुसार चलेगा। सभी अवयव (Ingradients) और तेल की मात्रा आप तय करेंगे। आप चाहें तो मूंगफली का तेल डालें या जवस का या छछूंदर का या साण्डे का। सब आपकी मर्जी। आपकी भाजी और आपका नियम चलेगा। बस हंसते, खेलते, हर्षोल्लास के साथ देशी सब्जियां बनाई जाएंगी। Masterchef  स्टाइल में नहीं, सिर्फ देशी तरीके से।

सिर्फ इन भुला दी गई  स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जीयों के बारे में बताएंगे और  बनाने के लिए थोड़ी बहुत सलाह भी देंगे जिसे आप बिल्कुल नहीं मानेंगे, जानते हैं! फिर भी हम तो लिखेंगे! आदत हो गई है!

तो फिर शुरू करते हैं तवा भाजी के पहले एपिसोड से। पहला एपिसोड कम जानी पहचानी सब्जी पोई (Malabar Spinach) के बारे में। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक को  क्लिक करें: पोई, पोई!


पंकज खन्ना
9424810575

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हिन्दी में:

तवा संगीत : ग्रामोफोन का संगीत और कुछ किस्सागोई।
रेल संगीत: रेल और रेल पर बने हिंदी गानों के बारे में।
साइकल संगीत: साइकल पर आधारित हिंदी गाने।
ईक्षक इंदौरी: इंदौर के पर्यटक स्थल। (लेखन जारी है।)

अंग्रेजी में:

Love Thy Numbers : गणित में रुचि रखने वालों के लिए।
Epeolatry: अंग्रेजी भाषा में रुचि रखने वालों के लिए।
CAT-a-LOG: CAT-IIM कोचिंग।छात्र और पालक सभी पढ़ें।
Corruption in Oil Companies: HPCL के बारे में जहां 1984 से 2007 तक काम किया।


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